" सत्य ही ईश्वर है " इसका वास्तविक अर्थ।

सत्य ही ईश्वर है यह नाम आपने कम ही सुना होगा क्योंकि इसका वास्तविक अर्थ जानने की आपने कभी कोशिश ही नहीं की आज मैं आपको इस ब्लॉग में इसे सरल शब्दों में  समझाऊंगा।


सत्य ही ईश्वर है -

सत्य का मतलब होता है जिसे ठुकराया नही जा सकता यह एक तथ्य होता है जिसे न चाहते हुए भी अस्वीकार नही किया जा सकता। क्योंकि हमारे भीतर कुछ मौजूद है जो सच का प्यासा है, जिसे सत्य से प्यार है । हम उसे आम भाषा में आत्मा बोल सकते है।उसे ईश्वर भी बोल सकते है ।

सत्य ही सर्वोपरि -

सत्य जब सामने आता है तब कोई भी व्यक्ति चाहे वह कितना भी बड़ा क्यूं न हो, उसे झुकना ही पड़ता है। क्योंकि आत्मा के ऊपर झूठों का पर्दा पड़ा रहता है। परंतु जब उस पर सच का प्रकाश पड़ता है तो उसका अहंकार झुक जाता है।

सत्य के सामने झूठ की स्थिति -

झूठ की अपने  आप में कोई सत्ता नहीं होती क्योंकि यह बेबुनियाद होता है । यह सच के सामने आने से डरता है। क्योंकि सत्य का मतलब ही ईश्वर का प्रकाश होता है। इसलिए कहते हैं कि सत्य ही ईश्वर है। 

सत्य के केंद्र से कार्य -

व्यक्ति जो भी काम करता है वह या तो अहंकार द्वारा पोषित होता है या समाज द्वारा निर्धारित होता है। जिसे करने से  उसे वास्तविक आनंद नहीं मिलता परंतु जब कार्य सत्य को केंद्र में रखकर किया जाता है तभी वास्तव में उसे आत्मिक शांति की अनुभूति होती है 

ईश्वर का निवास केवल सत्य में -

जहां सत्य है वही भगवान वास करते है  "सत्यम शिवम सुंदरम" मैं काफी अच्छे से परिभाषित किया गया है। सत्य ही ईश्वर है इसके माध्यम से सत्य को काफी गरिमा पूर्ण तरीके से दर्शाया गया है। अगर हमें ईश्वर तक जाने का मार्ग खोजना है तो सत्य को ही केंद्र बनाना पड़ेगा।

गांधी जी के दृष्टिकोण से "सत्य ही ईश्वर है" -

गांधी जी अपनी हर बात मे सत्य को सर्वोपरि रखते थे। वे अपने सभी कर्मों को सत्य केंद्र से संचालित करते थे। क्योंकि  उनका मानना था कि जो सच के साथ है वह मेरे साथ है उन्होंने सत्य को ही ईश्वर का दर्जा दे रखा था।


अंततः अंतिम निष्कर्ष यही निकलता है कि हम अपनी वाणी, कर्मों व विचारों को सत्य के केंद्र से संचालित करें तो हमें निश्चित रूप से आंतरिक शांति की अनुभूति होगी।

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