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आचार्य प्रशांत के दृष्टिकोण से जीवन जीने के सूत्र।

क्या आपने कभी सोचा है कि आज का युवा अपनी ज़िन्दगी में इतना परेशान क्यों हैं। उसके जीवन में किसी वस्तु की कमी है या इसका कुछ और ही कारण है? आइये हम आज दार्शनिक आचार्य प्रशांत के विचारों से समझते हैं। *** आचार्य जी के अनुसार जीवन क्या है - हर व्यक्ति का नज़रिया अलग होता है। जीवन को देखने का सही केन्द्र है बिना डर और लालच के जीना । आचार्य प्रशांत के अनुसार अगर कोई व्यक्ति सत्य को केंद्र मानकर डर और लालच से परे है तो वह खुला जीवन जी सकता है। और जो व्यक्ति सत्य के साथ चलेगा वह आत्मिक रूप से कभी दुखी नहीं होगा। *** जीवन का उद्देश्य सिर्फ जीवित या जागृत रहना - कभी सोचा है कि हमें ये जीवन किस लिए मिला है? इसका उद्देश्य क्या हो सकता है? क्या सिर्फ पैदा होकर बेहोशी में जीवन जीने से ही जीवन सफल हो जायेगा। जब हम चैतन्य होकर अर्थात होश के साथ जीवन जीना शुरू करते हैं तो हम पाते हैं कि जीवन को देखने का नज़रिया ही बदल चुका है। अब हमें आस-पास आनन्द की अनुभूति होने लगती है। ऐसी स्थिति में ज़िन्दगी बड़ी ही मूल्यवान लगती है क्योंकि उस समय आप स्वयं के निकट होते हैं। तो जीवन का उद्देश्य आचार्य प्रशांत के अनुसार ...